9b45ec62875741f6af1713a0dcce3009 Indian History: reveal the Past: Bagha jatin

यह ब्लॉग खोजें

लेबल

in

बुधवार, 2 अप्रैल 2025

Bagha jatin

Bagha jatin
प्रस्तावना

प्रस्तुत लेख में हम क्रांतिकारी नेता बाघा जतिन के बारे में चर्चा करेंगे तथा हम उनके असली नाम के बारे में बतायेंगे तथा उनका बाघा जतिन नाम किस प्रकार पड़ा उस घटना के बारे में भी चर्चा करेंगे।.

जीवन परिचय

बाघा जतिन,जिनका असली नाम यतींद्रनाथ मुखर्जी था, एक प्रमुख भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी नेता थे। उनका जन्म 7 दिसंबर 1879 को बंगाल के कुस्टिया में हुआ था। उन्हें "बाघा" का नाम इसलिए मिला क्योंकि उन्होंने एक बार एक बाघ से लड़ाई की थी और उसे मार डाला था,जिससे उनकी वीरता की ख्याति फैल गई।.

उनके परिवार के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी निम्नलिखित है-

पिता- बाघा जतिन के पिता का निधन उनकी अल्पायु में ही हो गया था। उनके पिता का नाम उमेशचन्द्र मुखर्जी था,लेकिन उनका निधन जतिन के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला।माता- उनकी माता का नाम सरस्वती था। उन्होंने अपने बच्चों की परवरिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उन्हें शारीरिक तथा मानसिक विकास के लिए प्रोत्साहित किया। सरस्वती एक प्रतिभाशाली कवित्री थीं और बांग्ला साहित्य का अच्छा ज्ञान रखती थीं।

भाई-बहन- बाघा जतिन की एक बहन थी,जिनका नाम विनोद बाला था। विनोद बाला ने अपने भाई की बहादुरी और उनके प्रति माता के शिक्षण के बारे में कई कहानियाँ साझा की हैं।बाघा जतिन की पत्नी का नाम इंदुबाला बनर्जी था। उन्होंने 1900 में इंदुबाला से विवाह किया था,और इस जोड़े के चार बच्चे हुए- अतिंद्र (1903-1906),आशालता (1907-1976),तेजेंद्र (1909-1989),और बिरेंद्र (1913-1991)।.परिवार का समर्थन- उनके मामा बसंत कुमार,जो कि एक सरकारी वकील थे,ने भी जतिन और उनकी बहन की परवरिश में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने बच्चों की शिक्षा और विकास पर ध्यान दिया।बाघा जतिन का परिवार उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण आधार बना, जिसने उन्हें स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भाग लेने के लिए प्रेरित किया।

शिक्षा

प्रारंंभिक शिक्षा- उनकी प्रारंभिक शिक्षा कृष्णानगर में हुई,जहां उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा पुरी की। 
कोलकाता में उच्च शिक्षा- 1895 में,जतिन ने कोलकाता के सेंट्रल काॅलेज  जो कि वर्तमान समय में (खुदीराम बोस काॅलेज)में दाखिला लिया,जहां उन्होंने ललित कला का अध्ययन किया। इस दौरान उन्होंने स्वामी विवेकानंद के संपर्क में आकर उनकी विचारधारा से प्रभावित हुए और उनके साथ जुड़ गए।
शिक्षा का प्रभाव-जतिन ने अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली से तंग आकर नियमित रुप से लिखना शुरु किया और भारत के ब्रिटीश शोषण के खिलाफ अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने एक भारतीय राष्ट्रीय सेना की आवश्यकता पर भी लिखा।.
स्वामी विवेकानंद का प्रभाव- स्वामी विवेकान्द के संपर्क में आने से जातिन कि विचारधारा में परिवर्तन आया औ उन्होंने स्वामी जी के साथ मिलकर सामाजिक सेवा कार्यों में भाग लेना प्रारम्भ कर दिया उन्होंने भगिनी निवेदिता के साथ मिलकर कान किया और कुश्ती भी सिखी।.
इन शिक्षाओं और अनुभवों ने बाघा जातिन को एक मजबूत और स्वतंत्रता के लिए समर्पित नेता बनाया,जिन्होंने भारतीय भारतीय स्वतंत्रता में महत्वपुर्ण योगदान दिया।.

योगदान

  1. प्रमुख नेता के रुप में-बाघा जतिन युगांतर पार्टी के प्रमुख नेताओं में से एक थे, जो बंगाल में क्रांतिकारियों का एक महत्वपूर्ण संगठन था। उन्होंने सशस्त्र विद्रोह के लिए युवाओं को प्रेरित किया और कई डकैतियों का आयोजन किया ताकि धन जुटाया जा सके।.
  2. गदर आंदोलन- उन्होंने गदर पार्टी के सदस्यों के साथ मिलकर भारतीय स्वतंत्रता के लिए जर्मन सरकार से समर्थन प्राप्त करने की कोशिश की। उनका उद्देश्य भारत में ब्रिटिश शासन को समाप्त करना था।.
  3. जुगांतर पार्टी का नेतृत्व- बाघा जतिन ने जुगांतर पार्टी का नेतृत्व किया,जो बंगाल में क्रांतिकारी गतिविधियों का एक प्रमुख संगठन था। उन्होंने 'आमरा मोरबो,जगत जागबे' का नारा दिया, जिसका अर्थ है "जब हम मरेंगे तभी देश जागेगा"। इस नारे ने कई युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।.
  4. सशस्त्र विद्रोह की योजना- बाघा जतिन ने जर्मन सरकार के साथ संपर्क स्थापित किया और भारत में सशस्त्र क्रांति की योजना बनाई। उन्होंने 'हिंदू-जर्मन कांस्पिरेसी' नामक योजना बनाई,जिसके तहत फरवरी 1915 में सशस्त्र विद्रोह करने की योजना थी। यदि यह योजना सफल होती,तो भारत 1915 में ही स्वतंत्र हो सकता था।.
  5. क्रांतिकारी गतिविधियाँ- उन्होंने कई स्थानों पर अंग्रेजों के खिलाफ डकैती डालकर धन और हथियार जुटाने का कार्य किया। उन्होंने अलीपुर बम कांड (1908) के बाद युगांतर संगठन की जिम्मेदारी संभाली और पूरे भारत में क्रांतिकारियों को संगठित किया।.
  6. अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष- बाघा जतिन ने अंग्रेजों को उनकी ही भाषा में जवाब देने का साहस दिखाया। उन्होंने कई बार अंग्रेज अधिकारियों पर हमला किया और अपनी बहादुरी से उन्हें चुनौती दी। 1915 में जब उन्हें गिरफ्तार करने के लिए पुलिस ने घेराबंदी की,तब उन्होंने अद्भुत वीरता दिखाई।.
  7. शहादत- 10 सितंबर 1915 को बाघा जतिन की मृत्यु हो गई। उनकी शहादत ने उन्हें एक अमर नायक बना दिया,और उनके बलिदान ने आगे चलकर रासबिहारी बोस और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं को प्रेरित किया।.

बाघा जतिन का साहस और त्याग भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अमिट छाप छोड़ गया है,और वे आज भी एक प्रेरणास्त्रोत के रूप में याद किए जाते हैं।

स्मारक और प्रतिमाएं

बाघा जतिन के नाम पर स्थापित प्रमुख स्मारक और प्रतिमाएं निम्नलिखित हैं-

स्मारक और प्रतिमाएं- बाघा जतिन की शहादत की याद में विभिन्न स्थानों पर स्मारक और प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। उनकी प्रतिमाएं विशेष रूप से बंगाल में कई स्थानों पर देखी जा सकती हैं,जहां उन्हें एक नायक के रूप में सम्मानित किया गया है। बाघा जतिन स्मारक पार्क- चासाखंड,बालासोर (ओडिशा) में स्थित यह पार्क और स्मारक उनकी अंतिम लड़ाई की याद में बनाया गया है। यह स्थल उनकी वीरता को दर्शाता है।.

विक्टोरिया मेमोरियल प्रतिमा- कोलकाता में विक्टोरिया मेमोरियल के पास बाघा जतिन की आदमकद प्रतिमा स्थापित है, जो उनके योगदान को सम्मानित करती है।.

शिक्षण संस्थान- उनके नाम पर कई स्कूल और कॉलेज स्थापित किए गए हैं,जो उनके जीवन और कार्यों को प्रेरणा के रूप में प्रस्तुत करते हैं। ये संस्थान युवाओं को शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ स्वतंत्रता संग्राम के प्रति जागरूकता भी फैलाते हैं। 

बारबाती गर्ल्स हाई स्कूल प्रतिमा- बालासोर में बारबाती गर्ल्स हाई स्कूल के पास उनकी एक मूर्ति स्थापित है। यह स्थान उस अस्पताल के पास है जहां उन्होंने अंतिम सांस ली थी।. इसके अलावा भी अन्य महत्वपुर्ण शिक्षण संस्थान स्थापित किये गये है जो निम्नवत है-

बाघा जतिन कॉलेज- यह कॉलेज पश्चिम बंगाल में स्थित है और उच्च शिक्षा प्रदान करता है। इसका नाम उनके सम्मान में रखा गया है।.
बाघा जतिन कॉलोनी स्कूल- कोलकाता के बाघा जतिन कॉलोनी क्षेत्र में स्थित कई स्कूल उनके नाम पर हैं, जो शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्रदान कर रहे हैं।.

बाघा जतिन के नाम पर सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण कार्य और सम्मान दिए गए हैं,जो उनके योगदान को मान्यता देते हैं। इनमें शामिल हैं-
सड़कें और पुल- कई शहरों में बाघा जतिन के नाम पर सड़कें और पुल बनाए गए हैं। ये संरचनाएं उनकी विरासत को जीवित रखने का कार्य करती हैं और लोगों को उनके योगदान की याद दिलाती हैं।

सांस्कृतिक कार्यक्रम- सरकार द्वारा बाघा जतिन की शहादत के उपलक्ष्य में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है,जिसमें उनके जीवन और कार्यों पर चर्चा होती है। यह कार्यक्रम नई पीढ़ी को उनके विचारों और बलिदान के बारे में जागरूक करते हैं।

इन कार्यों के माध्यम से बाघा जतिन की विरासत को संरक्षित किया जा रहा है,और उन्हें एक महान स्वतंत्रता सेनानी के रूप में याद किया जाता है।

कोई टिप्पणी नहीं: